Bounce Rate Kya Hai? What Is Bounce Rate In Hindi

Bounce Rate Kya Hai

क्या आप जानते हैं की Bounce Rate Kya Hai(What is Bounce Rate in Hindi)

Blog और website के लिए bounce rate बहुत ज़रूरी होता है और bounce rate blog और website की ranking को भी प्रभावित करता है|

तो चलिए bounce rate के बारे में विस्तार से जानते हैं|

Bounce Rate in Hindi – बाउंस रेट से हमारा अभिप्राय -वेबसाइट पर आने वाला विजिटर कितनी देर तक वेबसाइट पर रहता है या फिर यूँ कहे कि वेबसाइट के विजिटर की वह परसेन्टेज होती है जो कि आपकी वेबसाइट पर एक बार आने पर सिर्फ एक ही पेज को देखते है और कम से कम समय में उस पेज़ से लीव कर चले जाते हैं।

साधारण भाषा में कहें तो बाउंस रेट का मतलव है कि जब गूगल से आपकी साइट पर कोई यूजर आता है, और फटाफट उसी पेज को देखकर चला जाता है तो उसके ब्लॉग की बाउंस रेट बढ़ जाती है यदि वह यूजर वेबसाइट के अन्य पेज भी विजिट करता है तो आपका बाउंस रेट कम होने लगता है, जो SEO के हिसाब से सही होता हैं। 

उदाहरणानुसार मान लीजिए कि मेरे द्वारा वेबसाइट पर लिखा गया ब्लॉग का लेख लगभग 1000 शब्दों का है और इसे पूरा पढ़ने में 4 मिनट का समय लगता है और 4 उस वेबसाइट पर विजिटर के आने के बाद 20 सकेंण्ड में ही बाहर निकल जाता है, तो उस विजिटर द्वारा बिताये गये समय के मापन को बाउंस रेट कहते हैं।

ब्लॉग पर यूजर के बाउंस करने के कई कारण हो सकते है जैसे कटेंट का अच्छा ना होना या फिर यूजर जो जानकारी सर्च कर रहा है, उस जानकारी का ब्लॉग पोस्ट में मौजूद न होना इत्यादि। किसी भी वेबसाइट का बाउंस रेट उस वेब साइट से होने वाली अंर्निग और साथ ही गूगल या किसी अन्य सर्च इंजन में उसकी रैंकिग को सीधे प्रभावित करता है।

विभिन्न वेबसाइटो की कटेंट की क्वालिटि के आधार पर बांउस रेट अलग-अलग होता है।

बाउंस रेट कितना होना चाहिए?

Bounce rate kya hai, इसको जानने के बाद अब हम यह जानने कि कोशिश करेगें कि हम अपने बाउंस रेट को कितना रखे जिससे कि हमारी बाउंस रेट सामान्य रह सकें।

सीधे शब्दों में कहे तो जीतना बाउंस रेट कम होगा उतना बेहतर है।

कटेंट की क्वालिटि के आधार पर बांउस रेट भिन्न-भिन्न होते है।

अगर हम सुरक्षित और अच्छे रेट की बात करे तो 30 प्रतिशत से कम होना बहुत ही बेहतर है।

30-40 प्रतिशत का बांउस रेट होना एवरेज़ है।

40 प्रतिशत या उससे अधिक की बाउंस रेट का मतलव बदतर है।

80 90 प्रतिशत का मतलव लगभग बुरा है।

यदि 1 प्रतिशत से 10 प्रतिशत के अन्दर कोई ब्लॉग का बाउंस रेट है तो वो दुनिया के कामियाब वेब साइटो की लिस्ट में आती है उसके बाद अगर 10 प्रतिशत से 40 के अन्दर कोई ब्लॉग का बाउंस रेट है तो वो भी बढ़िया हैं। वेब साइटो का बाउंस रेट कितना अच्छा है और कितना होने पर हानिकारक है इसे ठीक रूप से समझने के लिए कुछ आकड़ो की सहायता लेगे|

  • कटेंट वाली वेब साइटो के लिए बाउंस रेट 40 – 60 प्रतिशत
  • लीड जनरेट करने वाली वेब साइट के लिए बाउंस रेट 30-40 प्रतिशत तक होना चाहिए ।
  • ब्लॉग वाली साइटो के लिए बाउंस रेट 70 प्रतिशत तक चाहिए। 
  • रिटेल कारोबार करने वाली साइट 20-40 प्रतिशत तक।
  • सर्विस पॉवाइड करने वाली साइट के लिए बाउंस 30 प्रतिशत तक।
  • Landing Page वाली साइट के लिए बाउंस रेट 70-90 प्रतिशत तक होना चाहिए।

बाउंस रेट बढ़ने के कारण

बाउंस रेट बढ़ने के बहुत से कारण है जिनमें सें हम कुछ के मुख्य कारणो कि विस्तारपूर्वक चर्चा करे

1. वेब पेज का स्लो होना

किसी भी वेब साइट के पेज़ की स्पीड लोडिग होते समय धीमी है तो बाउंस रेट बढ़ने का ज्यादा खतरा रहता है।

वेबसाइट की loading speed सबसे बढ़ा रैंकिग फैक्टर है।

यदि कोई विजिटर आपके ब्लॉग पर आता है और आपका ब्लॉग बहुत धीरे-धीरे लोड हो रहा है तो विजिटर बिना पढ़े ही आपके ब्लॉग से निकल जाता है।

इसलिए हमें अपनी वेब साइट के पेज को जल्दी या तेजी से लोड करने के लिए हमें अच्छे से अच्छे web hosting का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

2. वेबसाइट पर यूजर का ध्यान केद्रित ना करना

यदि आप यूजर का ध्यान अपने ब्लॉग की तरफ केद्रित नहीं कर पाए तो आपका बाउंस रेट कभी कम नहीं होगा।

जब भी आप कोई कटेंट लिखते है तो छोटा और फालतू कटेंट न लिखे एवंम ब्लॉग को लिखने पर इन्टरनल लिक्गिं और विडियो तथा जरूरी टिप्स और फोटो आदि का यूज न करने से ही आपका बाउंस रेट बढ़ता है।

3. ब्लैंक पेज़ और टेक्निकल एरर का होना

आपकी साइट या ब्लॉग में ब्लैक पेज और technical का होना यह भी एक बढ़ा कारण है बाउंस रेट बढ़ने का जैसे

4. किसी वेब पेज का ऑपन नहीं होना।

वेब पेज का ब्लैन्क होना या केश होना। किसी वेब पेज में broken link का होना। इमेज का सही से लोड नहीं होना ।

वेब पेज पर ज्यादा एड्स का होना। AMP(Accelerated Mobile Pages) सेटअप का सही से नहीं होना।

5. लो क्वालिटि कटेंट का होना

किसी भी साइट के ब्लॉग में कटेंट की लो क्वालिटि होना बाउंस रेट बढ़ने का सबसे मुख्य कारण है।

अगर आप लो क्वालिटि का कटेंट लिखते है जिसमें यूजर के सवाल का जबाव तो होगा पंरतु कटेंट की लो क्वालिटि की वजह से वह आपके पज को विजिट नहीं करेगा जिससे कि आपके ब्लॉग की बाउंस रेट में काफी बढोत्तरी हो जाएगी और गूगल रैकिग भी इफेक्ट होगी।

इसलिए एक high quality content लिखना चाहिए जो यूजर के सवाल के जबाव तो दे ही साथ में दुसरे लेख पर जाने के लिए विवश हो जाये।

6. आउटबाउंड लिंक को गलत तरीके से करना

अगर हम अपने ब्लॉग में आउटबाउंड लिंक को गलत तरीके से यूज करेगे तो आपके वेब साइट या ब्लॉग का बाउंस रेट ज्यादा हो जाएगा।

अगर हम आउटबाउंड लिकिंग करने पर सावधानी नहीं रखी तो आपके विजिटर दूसरी वेब साइट पर जा सकते है।

बाउंस रेट को कम करने के उपाय

हम निम्नलिखित उपाय दवारा बाउंस रेट को कम या सामान्य बना कर रख सकते है|

1. साइट डिजाइन और लुक अच्छा होना चाहिए

 अगर आपकी वेब साइट का लुक देखने में अच्छा होगा तब उसकी और विजिटर अपने आप अर्टेक्ट हो जाते है इसके अलावा अगर आपकी वेब साइट और ब्लॉग दिखने में अच्छे लगेगे तो विजिटर आपकी वेब साइट की और अपने आप आएगें और आपके कटेंट पढ़ने में भी दिलचस्बी लेगे।

जब भी हम साइट डिजाइन या ब्लॉग लिख रहे हो तो आपको कलर कोम्विनेशन का सही से ज्ञान होना बहुत जरूरी है जिससे कि हम अपने ब्लॉग तथा वेब साइट को विजिटर की पसंद अनुसार कलर साइट को मंटेन कर सकें।

इसके अलावा फॉन्ट साइज तथा टेक्ट साइज़ भी सही रखना चाहिए जिससे विजिटर को पढ़ने में कोई परेशानी नही हो।

2. पेज लोड टाइम पर ध्यान

अगर आपकी साइट पर ब्लॉग पेज का लोडिग समय ज्यादा है तो इसका मतलव हुआ कि विजिटर को ब्लॉग तक पहचने से पहले हि समस्या शुरू हो जाना या ब्लॉग तक पहुंचने से पहले मना कर देना अगर आप ब्लॉगर है तो आपको वेबपेज के लोडिग समय पर हमेशा ध्यान देना चाहिए।

आपके साइट के पेज का लोडिग समय 1 सेंकण्ड से कम मतलव परफेक्ट है।

1 सेकण्ड से 3 सेंकण्ड मतलव एंवव एवरेज है।

3 सेंकण्ड से 7 सेंकण्ड मतलव एवरेज 7 सेंकण्ड से ज्यादा मतलव बहुत खराब अगर आपको बाउंस रेट कम रखना है तथा अपने विजिटर को खुश रखना है तो परफेक्ट या फिर एंवव एवरेज लोडिग समय रखे इसके साथ पेज में सीमित फोटो और कम साइज़ का इमेज़ इस्तेमाल करें जिससे पेज लोड समय कम होगा।

3. क्वालिटि कंटेंट लिखना

आपकी साइट में अगर क्वालिटि वाले कटेंट होगे तो आपकी साइट को ब्रान्ड बनाने में काफी सहायता होगी।

इसके अलावा अगर आपका कटेंट लो क्वालिटि का होगा तो विजिटर आपकी साइट से अपने आप वापस चले जाएगे क्योंकि ऐसे बहुत से वेबसाइट है जो कि आप की वेबसाइट की तुलना में बेहतर से बेहतर कटेंट प्रदान करते होगे।

अगर आप कटेंट लिख रहे है और जो मन में आया वही लिख रहे है वहा पर सही सूचना नही दे रहे, इससे आपकी साइट का रैंक कम हो जाएगा इसलिए कटेट से सबंधित सही जानकारी ही कटेंट में लिखें।

अगर आप क्वालिटि कटेंट अपने ब्लॉग में बना कर रखेंगे तो थोड़ा समय लगेगा लकिन विजिटर अंच्छे आएगे और आपके साइट का बाउंस रेट भी थोडा कम हो जाएगा।

इसके अलावा बाउंस रेट को कम करने के लिए आप वही कटट लिखे जिसे विजिटर सर्च करते हुए आपकी वेब साइट में पहुंचा है।

4. विजिटर फेंडली हैडिग डालें

आप आपने साइट के ब्लॉग की हैंडिग एकदम सें फेंडली होनी चाहिए जिससे कि आपके विजिटर आपके ब्लॉग हैंडिग से ही आकर्षित हो कर आपके सम्पूर्ण वेब साइट के पेज को विजिट कर सके।

जिससे कि आपके साइट का बाउंस रेट भी कम हो जाएगा।

5. कटेंट फॉरमेटिग पर फॉक्स करें

हमें अपने ब्लॉग के कटेंट को फॉरमेटिग को अच्छे ढग से करना चाहिए जिससे विजिटर को भी अच्छा लगे।

आपके आर्टिकल की फॉरमेटिग सही होनी चाहिए और वर्ड की सेन्टेश सही होनी चाहिए तथा इसके लिए सही फॉन्ट और सही फॉन्ट साइज़ का इस्तेमाल करें।

यदि फॉन्ट साइज आवश्यकता से अधिक बड़ा या छोटा होता है तो यूजर को आटिकल पढ़ने में समस्या हो सकती है तो कटेंट लिखते वक्त इन बातों पर ध्यान दे और यूजर एक्सपीरियस का भी ध्यान रखें|

6. इंटरनल लिंक पे फॉक्स डाले

अगर आप अपने ब्लॉग के पेज़ के बीच बीच में गलत इटरनल लिंक का उपयोग करोगे तो आपके बाउंस रेट में बढ़ोत्तरी ही होती जाएगी ऐसा इसलिए क्योकि अक्सर कुछ ही समय में रिडर आपके कटेंट को नामात्र का पढ़ कर और उसके बाद उसे बंद कर चले जाएगे।

इसलिए अपने ब्लॉग के पेज़ ब्लॉग से सम्बधित इंटरनल लिंक का ही उपयोग करे जिससे कि विजिटर को भी आपके कटेंट पढ़ने में आसानी होगी जिस से आपके बाउंस रेट में कमी होगी।

7. इंटरनल लिंक दुसरे पेज पर खुलना चाहिए

आपने अगर अपने ब्लॉग में इटरनल लिक का प्रयोग किया है या साइट में डाल रहे हो तो इसमे जरूर ध्यान देना चाहिए कि जब भी विजिटर आपके पोस्ट के इंटरनल लिंक पर क्लिक करे तो वो लिंक नए पेज़ में खुलना चाहिए जिससे कि विजिटर जिस आर्टिकल को पढ़ रहे है वो एक टैब खुला है ओर दुसरा एक ओर टैब में खुल जाएगा ये भी बांउस रेट को कम करने में मदद करेगा।

8. पेज़ एरर साल्व करें

जब सर्च इंजन पर आपकी कोई पोस्ट अच्छी रैंक कर रही होती है तो ऐसे में आपको ध्यान देना है कि उस पोस्ट के यूआरएल में कोई एरर जैसे कि 404 नॉट फाउड या पज नॉट फॉउड इत्यादि न हो।

ऐसे में यदि विजिटर आपके ब्लॉग यूआरएल लिंक में क्लिक करता है और उसे कोई पज एरर मिलता है तो वह तुंरत आपकी वेब साइट से बाउंस कर जाता है।

इसलिए आप यह सुनिश्रित कर ले कि आपके पोस्ट के यूआरएल में कोई एरर मौजूद नहीं है।

इसके बाद भी यदि आपके पेज में टेक्निकल एरर की समस्या आ रही है तो आप उस पज के लिए रिडारेक्शन लगा सकते है।

निष्कर्ष: Bounce Rate Kya Hai

यह था हमारा article Bounce Rate Kya Hai. इस article में हमने आपको बताया है की बाउंस रेट बढ़ने के क्या कारन हैं और आप कैसे बाउंस रेट कम कर सकते हैं| 

धन्यवाद| 

Vijay Kumar

CashFlow INDIA की स्थापना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Vijay Kumar ने की है। अपने दो ऑनलाइन और दो ऑफ़लाइन व्यवसायों के साथ असफल होने के बाद, उन्होंने रास्ते में सीखे गए सबक सिखाने के लिए CashFlow INDIA बनाया। CashFlow INDIA को लॉन्च करने के बाद से, Vijay ने जल्द ही रणनीतियों को प्रकाशित करके खुद के लिए एक नाम बना लिया, जिसका उपयोग मार्केटर अपने ऑनलाइन व्यवसाय को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। CashFlow INDIA अब सबसे लोकप्रिय हिन्दी ब्लॉगों में से एक है।

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